!! गौ-बन्देमातरम !!

महापुरूषों की दृष्टि में गाय :-
2. जो मनुष्य प्रातः काल उठकर गौ का स्पर्श करता है, वह सब पापों से मुक्त हो जाता है। ..... बह्माजी ने नारद जी (पद्य पुराणा)
3. ज्ीम ब्वू पे ं ूवदकमतनिस संइवतंजवतल ;गाय एक आश्चर्य जनक रसायनशाला) ..... पुस्तक ;न्ै।द्ध
4. गाय का दूध और घी तुम्हारी तन्दुरूस्ति के लिए बहुत जरूरी है। उसका गोस्त नुकसान देह और बीमारी पैदा करता है, जबकि उसका दूध दवा है।’’ ...... हजरत मुहम्मद साहब (नासि हाते हादौ पुस्तक)
5. यही देहु आज्ञा तुरूक को खपाऊँ, गौ माता का दुःख सदा में मिटाऊँ। ..... गुरू गोविन्द सिंह जी
6. जो पशु हो तो कहा बसु मेरो, चरो नित नंद की धेनु मंझारन। ...... कवि रसखान
7. ‘गौ’ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की धाती होने के कारण कामधेनु है। इसका अनिष्ट चिन्तन ही पराभव का कारण है। ...... महर्षि अरविन्द जी
8. यदि हम गौ की रक्षा करेगें तो गौ हमारी रक्षा करेगीं। ... पण्डित मदन गोपाल मालवीय जीे
9. हिन्दुस्तानी सभ्यता का नाम ही गौ सेवा है ................. आचार्य विनोबा भावे जी
10. जल से परिपूर्ण चारों समुन्द्र गाय के चारो स्तन है। ....... श्रीकृष्ण जी ने............ युधिष्ठिर से
11. गौ सर्व देवमयी और वेद सर्वगोमय है। .............. स्कन्द पुराणा
12. गौ रक्षा का प्रश्न स्वराज के प्रश्न से भी अधिक महत्वपूर्ण है ............... राष्ट्रपिता महात्मा गांधी
13. एक बैल को मारना, एक मनुष्य को मारने के समान है .......... ईसा मसीह
14. जिसके रोम रोम से अपने राष्ट्र की एकता प्रस्फूरित होती है, यदि उसका संरक्षण नहीं हुआ तो इस देश का उत्थान कैसे होगा?वस्तुतः गौमाता ही हमें एकत्र ला सकती है। गौमाता हमारे राष्ट्रजीवन की आधार स्तम्भ है। ...... पू0पू0 श्री गुरू जी
15. संसार में हिन्दू कहलाकर जीवित रहना चाहते हो तो प्राणप्रण से गोरक्षा करो। (प्रभुदत्त ब्रह्मचारी)
16. भारत में गोपालन सनातन धर्म है (भारत के प्रथम राष्ट्रपति डाॅ॰ राजेन्द्र प्रसाद)
17. एक गाय अपने जीवन काल में 4,10,440 मनुष्यों हेतु एक समय का भोजन जुटाती है। जब कि उसके मांस से 80 मांसाहारी केवल एक समय अपना पेट भर सकते हैं। (स्वामी दयानन्द सरस्वती) 
18. चाहे मुझे तुम मार डालो, पर गाय पर हाथ न उठाओ। (लोकमान्य तिलक)
19. गाय उन्नति और प्रसन्नता की जननी है। गाय कई प्रकार से अपनी जननी से भी श्रेष्ठ है। (महात्मा गांधी)
20. यह आश्चर्य की बात नहीं है कि समाज की संरक्षिका, गाय के प्रति, हिन्दू समाज कोमल तथा अंहिसक है। (जवाहर लाल नेहरू, प्रथम प्रधानमंत्री)
21. गोरक्षा ही राष्ट्र रक्षा है। (अशोक सिंघल, महामंत्री विहिप)