हरि के द्धार

श्री कृष्ण के जीवन की प्रत्येक घटना कुछ ना कुछ संदेश अवश्य देती है । वह कहते हैँ कि महिलाओँ के प्रति सम्मान होना चाहिये , अन्याय का विरोध होना चाहिये , लेकिन व्यक्तिगत जीवन मे हमेँ सरल व सहज होना चाहिये ।========================
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जन्माष्टमी हमेँ सिखाती है -
1- महिलाओँ के प्रति आदरभाव -
महिलाओँ के प्रति सम्मान हो व उन्हेँ साथ लेकर चलने का भाव हो । नर्कासुर के यहाँ से आई 16000 महिलाओँ को पत्नी का सम्मानजनक दर्जा देने का कार्य उनके इस भाव को दर्शाता है ।
2- कला से प्रेम-
संगीत व कला का हमारे जीवन मेँ विशिष्ट स्थान है । भगवान ने मोरपंख व बांसुरी धारण करके कला , संस्कृति व पर्यावरण के प्रति अपने प्रेम को दर्शाया है । इनके द्वारा उन्होँने संदेश दिया है कि जीवन को सुंदर बनाने मेँ संगीत व कला का महत्वपूर्ण योगदान है ।
3- निर्बल का साथ-
कमजोर व निर्बल का सहारा बनो । निर्धन बाल सखा सुदामा होँ या षडयंत्र के शिकार पांडव , श्री कृष्ण ने हमेशा निर्बलोँ का साथ दिया और उन्हे मुसीबतोँ से उबारा ।
4- अन्याय का प्रतिकार-
अन्याय का सदा विरोध होना चाहिये । श्री कृष्ण की शाँतिप्रियता कायर की नहीँ बल्कि एक वीर की थी । उन्होँने कभी अन्याय स्वीकार नहीँ किया । शाँतिप्रिय होने के बावजूद शत्रु यदि गलत है तो उसके शमन मेँ कभी पीछे ना हटेँ ।
5- अहंकार को छोड़ो-
व्यक्तिगत जीवन मेँ वह हमेशा सहज व सरल रहे । सर्वशक्ति सम्पन्न होने के बावजूद भी भगवान को ना तो युधिष्ठिर का दूत बनने मेँ संकोच हुआ और ना ही अर्जुन का सारथी बनने मेँ ।
दुर्योधन के घर का छप्पन भोग छोड़कर उन्होँने विदुर के घर का सादा भोजन करना पसंद किया ।
6- जीवन मेँ उदारता-
उदारता व्यक्तित्व को संपूर्ण बनाती है । श्री कृष्ण ने जहाँ तक हो सका मित्रता , सहयोग के सामंजस्य के बल पर ही परिस्थितियोँ को सुधारने का प्रयास किया , लेकिन आवश्यक्ता पड़ने पर बेहिचक सुदर्शन चक्र भी उठाया । वहीँ अपने निर्धन बालसखा सुदामा के चरण तक पखारे ।
जय श्री कृष्णा ,
श्री कृष्ण जन्माष्टमी की सभी को हार्दिक शुभकामनायेँ.