बम शंकर

जम्मू से लगभग 140 कि.मी. की दूरी ऊधमपुर नामक जगह पर भगवान शिव की यह चमत्कारी गुफा स्थित है, जिसे शिवखोड़ी के नाम से जाना जाता है।मान्यताओं के अनुसार, इस गुफा में खुद भगवान शिव निवास करते हैं और यहां पर एक सुरंग बनी हुई है इसका दूसरा अमरनाथ में जाकर मिलता है।अमरनाथ गुफा के दर्शन करने वाले श्रद्धालु इस गुफा के दर्शन करने के लिए जरूर जाते हैं।ऐसी मान्यता है कि गुफा में बनी इस सुरंग का दूसरा छोर बाबा अमरनाथ बर्फानी की गुफा में जाकर खुलता है। द्वापर युग में साधु संत इस सुरंग से होकर ही अमरनाथ को जाते थे, लेकिन कलयुग में जिसने भी इस गुफा में आगे जाने की कोशिश की, वह कभी नहीं लौटा। वर्तमान में इस सुरंग को बंद कर दिया गया है।इस गुफा में स्थापित शिवलिंग को लेकर माना जाता है कि वह शिवलिंग प्राकृतिक है। स्वयं-भू होने के कारण इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।
यह गुफा 3 मीटर ऊंची और 200 मीटर लंबी, 1 मीटर चौड़ी और 2 से 3 मीटर ऊंची है। इसके अलावा इस गुफा में कई प्राकृतिक चीजें हैं जैसे नंदी की मूर्ति, पार्वती की मूर्ति आदि। इस गुफा की छत पर सांप की आकृति भी बनी हुई है।
गुफा से जुड़ी एक पौराणिक कथा- 
मान्यता है कि इस गुफा को स्वयं भगवान शंकर ने बनाया था। प्रचलित कथा के अनुसार भस्मासुर ने तप कर भगवान शिव को प्रसन्न किया था। तब भस्मासुर ने शिव से यह वर पाया कि वह जिसके सिर पर हाथ रखे वह भस्म हो जाए। वर मिलते ही भस्मासुर भगवान शिव पर ही हाथ रखकर उन्हें भस्म करना चाहता था।
इस दौरान भगवान शंकर और भस्मासुर में भीषण युद्ध हुआ। युद्ध के बाद भी भस्मासुर ने हार नहीं मानी।
तब भगवान शंकर वहां से निकलकर ऊंची पहाड़ी पर पहुंचे और एक गुफा बनाकर उसमें छ‌िपे। आज वहीं गुफा शिव खोड़ी के नाम से प्रसिद्ध है।
मान्यता है कि भगवान शंकर को बचाने के लिए भगवान विष्णु ने सुंदर स्त्री का रूप लेकर भस्मासुर को मोहित किया। सुंदरी रूप में विष्णु के साथ नृत्य के दौरान भस्मासुर शिव का वर भूल गया और अपने ही सिर पर हाथ रख कर भस्म हो गया।
सुंदरी रूप में विष्णु के साथ नृत्य के दौरान भस्मासुर शिव का वर भूल गया और अपने ही सिर पर हाथ रख कर भस्म हो गया