कोरोना वायरस को लेकर देश में 24 मार्च काफी अहम दिन है। इस दिन पता चल सकता है कि इसके वायरस का संक्रमण सामुदायिक स्तर पर होना शुरू हो गया है या नहीं? भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) इस पर अहम जानकारी आज मंगलवार को दे सकती है। भारत में कोरोना डॉ. आरआर गंगाखेड़कर ने रविवार को कहा है, 'हम अभी यह बताने की स्थिति में नहीं हैं कि कम्यूनिटी ट्रांसमिशन हो रहा है या नहीं। मैथमेटिकल मॉडलिंग पर काम हो रहा है और हमें मंगलवार तक कुछ जानकारियां मिल जाएंगी।
गणना करने में मदद मिलेगी : डॉ. आरआर गंगाखेड़कर ने कहा कि मंगलवार तक हमें सबसे अच्छा और सबसे खराब स्थिति जानने रिसर्च शुरू करेंगे। ये सरकार को परीक्षण किटों की संभावित मांग की गणना करने में मदद करेगा। ICMR ने कोरोना वायरस को फैलने से रोकने की अपनी रणनीति में संशोधन करते हुए कहा कि श्वसन संबंधी गंभीर बीमारी, सांस लेने में दिक्कत और बुखार तथा खांसी की शिकायत के साथ अस्पताल में भर्ती सभी मरीजों की कोविड-19 संक्रमण के लिए जांच की जाएगी। ICMR के नए दिशा-निर्देशों में यह भी कहा गया कि संक्रमित लोगों के संपर्क में आने वाले लोगों की संपर्क में आने के पांचवें और 14वें दिन के बीच में जांच की जानी चाहिए, चाहे उनमें बीमारी के लक्षण दिखाई दे या न दे।

31 मार्च तक लॉकडाउन : कोरोना वायरस का प्रकोप अब पूरे भारत में बढ़ता दिख रहा है। कोरोना पर काबू पाने के लिए दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र सहित देश के 23 राज्यों में 82 जिले 31 मार्च तक लॉकडाउन रहेंगे। लॉकडाउन के दौरान पाबंदी के दायरे में लोकल, मेट्रो और इंटरस्टेट बसें भी आएंगी। केवल जरूरी सामान ले जाने वाली मालगाड़ियां ही चलेंगी। केंद्र ने राज्यों को निर्देश दिया कि जिन जिलों में कोरोना वायरस के मामले आए हैं, वहां केवल जरूरी सामान ले जाने वाले वाहनों को ही आने-जाने की मंजूरी दें यानी इन जिलों को लॉकडाउन कर दें।
देश में यह है स्थिति : भारत में यह माना गया कि ज्यादातर विदेश से आने वाले लोग इस बीमारी के वाहक हैं। इसलिए इस बीमारी की स्क्रीनिंग या जांच केवल उन्ही लोगों की हुई जो हाल फिलहाल में विदेश यात्रा से लौटे थे, लेकिन उस जांच के बावूजद यह बीमारी उन लोगों में भी फैल गई जो कभी विदेश नहीं गए। स्वास्थ्य अधिकारी इसे दूसरे चरण का संक्रमण मानते हैं, लेकिन अब अंदेशा है कि यह बीमारी समुदायिक स्तर पर संक्रमण यानी तीसरे चरण में प्रवेश करने वाली है।

लापरवाही भारी पड़ेगी : ग्राफ बता रहे हैं कि किस तरह शुरुआती दिनों में की गई लापरवाही इटली, दक्षिण कोरिया और ईरान में तबाही बनकर आ गई है। तकरीबन ये सभी देश शुरुआत में चुक गए और अब आपाधापी में रोकने के लिए हांथपांव मार रहे हैं। एक्सपर्ट का मानते हैं कि यह बीमारी खराब स्वास्थ्य सेवाओं और खराब मैनेजमेंट की वजह से भी फैल रही है। फिलहाल भारत में कोरोना वायरस से जुड़ी मृत्यु दर 2.10 फीसदी है. यह दर कुल मरीजों की संख्या और मृत्यु का अनुपात होता है। भारत में यह दर विश्व स्वास्थ्य संगठन के हाल के 3.4 के अनुपात से कम है। मृत्यु दर हमेशा सही तस्वीर नहीं बताती। जैसे जितनी जांच बढ़ेगी उतनी मरीजों की संख्या सामने आएगी।