बांधाघाट (हावड़ा) : श्रीमद् भागवत प्रचार समिति द्वारा आयोजित अष्ट दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के सातवें दिन व्यासपीठ पर आसीन भगवाताचार्य श्री जयप्रकाश जी शास्त्री ने कहा रसों के समूह को रास कहते हैं और रास के लिए श्री कृष्ण को समझना आवश्यक है।  श्री कृष्ण की प्रत्येक लीला आनन्द मय है परन्तु श्रीधाम वृन्दावन में कई गयी भगवान की लीला सर्वोपरि है।  चीरहरण प्रसंग पर विस्तार से बताया कि, जीव और ईश्वर के मिलन में अज्ञान रुपी जो  वस्त्र है, भगवान ने उस का हरण भागवत ज्ञान से किया है और उससे जीव का देहाभिमान निवृत हो जाता है।  श्री शास्त्री जी ने रुक्मणी विवाह प्रसंग पर कहा कि कैसे रुक्मणी ने भगवान श्री कृष्ण को पत्र लिखकर उन्हें अपने प्रेम और आस्था का संदेश दिया और उन्हें मन ही मन अपना जीवन साथी मान लिया।  श्री कृष्ण ने अपने  उपर आस्था रखने वाली रुक्मणी की विनती को स्वीकार कर उसका हरण कर उसे अपने बन्धन  में बाँध लिया।  श्री कृष्ण - रुक्मणी विवाह उत्सव श्री रामकिशन जी लुहारीवाला एवं श्री रामफल जी जिन्दल के परिवार के साथ मिलकर सब भक्तों ने बड़ी धूमधाम के साथ मनाया।  वाणी भूषण श्री शम्भू शरण जी लाटा की विषेश उपस्थिति से उत्सव और भी आनंदित हो गया। भागवत कथा के सातवें दिन के विराम के साथ ही यज्ञाचार्य श्री जयकुमार जी शास्त्री के  सानिध्य में श्री विनोद जी पटवारी ने अपने परिवार के साथ विष्णु सहस्र नाम महायज्ञ संसार के  कल्याण की कामना के साथ संपन्न किया।   समिति के आनन्द कुमार जैन ने बताया कि कल कथा के अन्तिम दिन सामुहिक सुन्दरकाण्ड पाठ का आयोजन भी किया गया है।