आज जब हर आदमी दूसरे की परवाह किये बग़ैर ज़िन्दगी की दौड़ में अंधाधुंध दौड़ रहा है, उसे ना तो अपने आस-पास घट रही चीज़ों से फ़र्क़ पड़ता है ना ही दुनिया में क्या हो रहा इस बात से। ऐसे में अगर कोई शख़्स अपना कैरियर, उज़्ज़वल भविष्य सब दाँव पर लगा कर, देश और दुनिया के लिए कुछ करने की सोचता है, तो अपने आप ही वो भीड़ से अलग और ख़ास हो जाता है।
ऐसे ही एक शख्स है शुभेंदु शर्मा, जो जापान में टोयोटा जैसी बड़ी कंपनी की अपनी हाई-प्रोफाइल जॉब छोड़ कर अपने देश भारत आ गए। इसका कारण क्या है ये जानकर आपको थोड़ी हैरानी जरूर होगी। जी, वो भारत इसलिए आ गए क्योंकि उन्हें यहाँ पड़ी हर बंजर ज़मीन पर वृक्षारोपण कर के वनीकरण करना है। सिर्फ भारत ही नहीं वो कहते है कि जब तक दुनिया के हर कोने में बंजर ज़मीन पर वो वनीकरण ना कर दें, तब तक उनका ये मिशन नहीं रुकने वाला।
वैसे भी जिस रफ़्तार से आबादी बढ़ रही है और हम भविष्य की चिंता किये बिना अपने वनों को नाश कर रहे हैं, वो दिन दूर नहीं जब शायद हमें ऑक्सीजन खरीदने की ज़रूरत महसूस हो। तो ऐसे में शुभेंदु जी का ये प्रयास किसी वरदान से कम नहीं है।
उन्होंने अपने काम की शुरुवात के बारे में बताया कि जापान में उनके ऑफिस के कुछ हिस्से, जो यूँ ही बंजर पड़े थे, उसके लिए बॉटनिस्ट, अकीरा मियावाकी को बुलाया गया, जिसमें उन्होंने एक अलग तरह से बागबानी की, जिससे महज़ कुछ ही महीनों में काफ़ी घने और बड़े पेड़ उग आये। ये आईडिया शुभेंदु को बहुत पसंद आया। उन्होंने यह प्रयोग उत्तराखंड के अपने घर के पीछे बने अहाते में किया और कुछ ही समय में वहाँ ढेर सारे वृक्ष उग आए और वनीकरण सफल हुआ।
शुभेंदु ने कुछ NGO के पास अपना ये आईडिया भेजा, मगर उन्हें वहाँ से निराशा ही हाथ लगी। इसके बाद उन्होंने स्वयं ही इस मिशन को आगे बढ़ाने के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी और 'Afforest' नाम से एक संस्था अकेले शुरू कर दी। थोड़े समय में उन्होंने सफलता प्राप्त की और अब उनकी संस्था में आठ लोग काम करते हैं। शुभेंदु की संस्था ने अब तक 6 देशों के 28 शहरों में सफ़लतापूर्वक वनीकरण किया है।
'मियावाकी मेथड' क्या है?
शुभेंदु जी बताते हैं कि मियावाकी मेथड में हम ज़मीन के बंजर पड़े टुकड़े पर बहुत नज़दीक-नज़दीक अलग-अलग प्रजाति के पौधे लगाते हैं, जो बहुत जल्दी ही अपने आंतरिक गुणों की वजह से ज़मीन को उपजाऊ बना देते हैं। ये प्रक्रिया सिर्फ दो दिनों में पूरी हो जाती है। पहले दिन ज़मीन की जुताई और दूसरे दिन बीज की बुआई हो जाती है। फिर जब तक ये वन विकसित ना हो जाए, संस्था के लोग उस पर अपनी नज़र बनाये रखते हैं।शुभेंदु जी कहते हैं कि जब तक दुनिया के हर कोने में बंजर पड़ी ज़मीन पर वो वृक्ष नहीं ऊगा देते, तब तक वो चैन से नहीं बैठेंगे,