कर्नाटक में आज शाम चार बजे येदियुरप्पा सरकार का फ्लोर टेस्ट है. बीजेपी नेता और सीएम येदियुरप्पा ने विधानसभा में बहुमत साबित करने का दावा किया है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, येदियुरप्पा को आज शाम चार बजे विधानसभा में बहुमत साबित करना है. हालांकि, येदियुरप्पा का दावा है कि वह बहुमत साबित कर देंगे. लेकिन यह इतना आसान नहीं दिखता, क्योंकि कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन का दावा है कि बहुमत उनके पास है. ऐसे में शाम चार बजे विधानसभा के भीतर क्या होगा और कर्नाटक की राजनीति में क्या परिस्थितियां बन सकती हैं? इस तरह के कई सवाल मन में हैं.

आइए जानते हैं उन चार संभावनाओं के बारे में, जो आज शाम कर्नाटक में नतीजे के तौर पर सामने आने वाली हैं.

अगर जेडीएस या कांग्रेस के 7 विधायक बीजेपी का समर्थन कर दें तो येदियुरप्पा की सरकार बच जाएगी.

हालांकि, इस मामलों में इन विधायकों को दल-बदल कानून का सामना करना पड़ेगा और विधायकों को अपनी विधायकी से हाथ धोना पड़ेगा.

अगर बीजेपी 14 विधायकों को शक्ति परीक्षण के दौरान विधानसभा से गैरमौजूद रखने में कामयाब हो जाती है तो इससे सदन में मौजूद विधायकों की कुल संख्या 207 हो जाएगी.

बीजेपी के पास 104 विधायक हैं. ऐसे में सदन में मौजूद कुल विधायकों के हिसाब से बीजेपी के पास बहुमत के लिए पर्याप्त विधायक हैं.

शक्ति परीक्षण के दौरान अगर विधानसभा में कुछ विधायक हंगामा खड़ा कर दें और प्रोटेम स्पीकर उन विधायकों को सदन से बाहर करने का आदेश दे दें.

ऐसी स्थिति में सदन में मौजूद विधायकों की कुल संख्या कम हो जाएगी. बहुमत का आंकड़ा घट जाएगा और येदियुरप्पा सरकार बच जाएगी.

येदियुरप्पा को अगर शक्ति परीक्षण से पहले ऐसा लगे कि उनके पास संख्या बल नहीं है और वह फ्लोर टेस्ट से पहले ही इस्तीफा दे दें.

ऐसे में वह फ्लोर पर बीजेपी की किरकिरी होने बचा लेंगे. इसके बाद अगले चुनाव में वह सहानुभूति का कार्ड भी चल सकते हैं.

कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन ने बीजेपी नेता को प्रोटेम स्पीकर बनाने का विरोध किया था. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रोटेम स्पीकर की अध्यक्षता में ही शक्ति परीक्षण होगा. फिलहाल, बीजेपी कोशिश कर रही है कि बहुमत हासिल करने के दौरान गोपनीय बैलेट का इस्तेमाल किया जाए, जिससे विधायकों की पहचान सामने न आने पाए और येदियुरप्पा की कुर्सी गिरने से बच जाए.