कहते हैं बेहतर राजनेता वही होता है जिसके पास फॉरवर्ड प्‍लानिंग हो। तमिलनाडु में इस वक्‍त राजनैतिक घमासान चल रहा है और यहां के सियासी घमासान पर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी नजरें जमा दी हैं। माना जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी पन्‍नीरसेल्‍वम की मदद से तमिलनाडु कमल खिलाने की तैयारी कर रही है। दरसअल, तमिलनाडु में जयललिता की मौत के बाद एआईएडीएमके में घमासान मचा हुआ है। पहले शशिकला ने जयललिता की गद्दी पर कब्‍जा जमाने के लिए पन्‍नीरसेल्‍वम को साइड लाइन कर दिया था। लेकिन, बाद में आय से अधिक संपत्ति के मामले में उन्‍हें ही जेल हो गई। लेकिन, घमासान कम होने की बजाए बढ़ता जी चला गया। यहां सियासी बवाल जारी है।बीजेपी भी यहां पर पूर्व मुख्‍यमंत्री पन्‍नीरसेल्‍वम पर ही दांव खेल रही है। वैसे भी वो जयललिता की पसंद रहे हैं। बीजेपी से जुड़े नेताओं का भी यही कहना है कि तमिलनाडु की सियासत में पन्‍नीरसेल्‍वम को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। बीजेपी का कहना है कि प्रदेश में जयललिता की राजनैतिक विरासत को सिर्फ वो ही आगे बढ़ा सकते हैं। दरअसल, बीजेपी ने यहां पर अभी से पन्‍नीर को लेकर माहौल बनाना शुरु कर दिया है। बीजेपी की नजर 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव पर भी है। बीजेपी चाहती है कि वो पन्‍नीरसेल्‍वम को अपने खेमें में मिला कर या फिर उसे सपोर्ट कर आगामी लोकसभा चुनाव में यहां पर अपनी बढ़त हासिल करना चाहती है। दरसअल, ये बात भी जगजाहिर है कि जयललिता का झुकाव भी बीजेपी की ही ओर था।भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का मानना है कि पन्‍नीरसेल्‍वम को लेकर 2019 में उनकी रणनीति अगर काम कर गई तो उसे काफी फायदा होगा। भारतीय जनता पार्टी के सूत्रों का मानना है कि तमिलनाडु के मौजूदा हालात में सिर्फ पन्‍नीर ही यहां पर उनकी नैया को पार लगा सकते हैं। इसमें फायदा सिर्फ बीजेपी का नहीं बल्कि पन्‍नीर का भी होगा। उन्‍हें शशिकला खेमे से लड़ाई में मजबूती भी मिलेगी। इसके साथ ही जयललिता के समर्थकों का भी पूरा समर्थन उन्‍हें मिल सकता है। यानी भारतीय जनता पार्टी और पन्‍नीर दोनों एक दूसरे के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकते हैं। बीजेपी सूत्रों का कहना है कि आने वाले चुनावों में तमिलनाडु में डिवीजन आफ वोट हर हालत में देखने को मिलेगा।भारतीय जनता पार्टी चाहती है कि वो यहां की 39 संसदीय सीटों में कम से कम 15 से बीस सीटों पर अपनी जीत हासिल करे। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को भी ये लगता है कि इस वक्‍त एआईएडीएमके के तमाम नेता भी ये सोचते हैं कि पन्‍नीरसेल्‍वम को केंद्र का पूरा सपोर्ट है। इसका फायदा उन्‍हें राज्‍य में भी देखने को मिल सकता है। दरसअल, राज्‍य के बहुत से विधायक नहीं चाहते हैं कि यहां पर मध्‍यावधि चुनाव हों। बीजेपी को लगता है कि पन्‍नीर का खेमा इस वक्‍त ज्‍यादा मजबूत स्थिति में है। यही हाल रहा तो राज्‍य में दो ही रास्‍ते बचते हैं या तो मध्‍यावधि चुनाव हों या फिर फिर से जोड़तोड़ कर मौजूदा सरकार को गिरा दिया जाए। डीएमके के नेताओं पर भी ये आरोप लगते रहे हैं कि वो राज्‍य सरकार को अस्थिर करने की कोशिश में जुटे हुए हैं। बहरहाल, यहां कुछ भी हो लेकिन, हर तरफ से बीजेपी के लिए फायदे का सौदा ही नजर आ रहा है।