पश्चिम बंगाल में दूर्गा प्रतिमा विसर्जन को लेकर चल रहे विवाद पर गुरुवार को कलकत्ता हाईकोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश ने ममता बनर्जी सरकार को फटकार लगाई। कोर्ट ने मुहर्रम समेत हर दिन सुबह 12 बजे तक मूर्ति विसर्जन की अनुमति दी है। इतना ही नहीं पुलिस को विसर्जन के मार्ग को सुनिश्चित करने को कहा। 

पढ़ें सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने ममता सरकार को क्या कहा...

1) कोर्ट ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि आप राज्य हैं तो आप मनमाने ढंग से आदेश पारित कर सकते हैं? 
2) कोर्ट ने कहा कि नियमन और निषेध के बीच अंतर होता है।
3) हाईकोर्ट के कार्यकारी चीफ जस्टिस ने पश्चिम बंगाल सरकार से कहा कि यदि आप सपने देखते हैं, तो कुछ गलत हो सकता है। पर ऐसा नहीं हो सकता है कि आप उस पर प्रतिबंध लगा दें।
4) कोर्ट ने कहा, क्या आप चंद्रमा को नियंत्रित कर सकते हैं। 
5) कोर्ट ने राज्य सरकार को कहा, पहले पानी फिर लाठीचार्ज हो।
6) कोर्ट ने कहा कि क्या कैलेंडर को रोक सकते हैं
7) कोर्ट ने ममता सरकार से कहा कि विसर्जन पर पाबंदी आखिरी विकल्प
8) बिना किसी आधार के ताकत का इस्तेमाल गलत है। आखिरी विकल्प का फैसला सबसे बाद में करना चाहिए।

9) कोर्ट ने कहा, सरकार लोगों की आस्था में दखल नहीं दे सकती है। बिना किसी आधार के ताकत का इस्तेमाल बिल्कुल गलत है।
10) न्यायालय ने कहा, सरकार के पास अधिकार है, लेकिन असीमित नहीं है। बिना किसी आधार के ताकत का इस्तेमाल गलत है, आखिरी विकल्प का फैसला सबसे बाद में करना चाहिए।

बुधवार को हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार के आदेश पर संज्ञान लेते हुए पूछा कि क्या दुर्गा पूजा और मुहर्रम साथ-साथ नहीं मनाया जा सकता? इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि जब आप ख़ुद भी मान रही हैं कि राज्य में सांप्रदायिक सौहार्द बरकरार है तो फिर दोनो संप्रदाय के लोगों के बीच सांप्रदायिक भेद-भाव क्यों पैदा किया जा रही है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा, 'दुर्गापूजा और मुहर्रम एक साथ क्यों नहीं मनाया जा सकता?'
कोर्ट ने पूछा कि जब राज्य सरकार इस बात को लेकर आश्वस्त है कि प्रदेश में सांप्रदायिक सद्भाव है फिर दोनों समुदायों में भेदभाव क्यों कर रही है। राज्य सरकार को उन्हें बांटना नहीं चाहिए।

क्या है पूरा मामला
दरअसल पिछले महीने ममता बनर्जी की सरकार ने आदेश दिया गया था कि शाम छह बजे के बाद मां दुर्गा की प्रतिमा का विजर्सन नहीं किया जा सकेगा। ऐसा इसलिए कहा गया था क्योंकि तीस सितंबर को दुर्गा पूजा है और एक अक्टूबर को मोहर्रम। राज्य सरकार के इस फैसले का भाजपा ने खुलकर विरोध किया था। जिसके बाद राज्य सरकार ने कलकत्ता हाई कोर्ट में साफ कर दिया है कि रात दस बजे तक मूर्ति विजर्सन किया जा सकेगा। एक अक्टूबर को मूर्ति विसर्जन पर रोक है, लेकिन दो को फिर से इसकी इजाजत है।

आपको बता दें कि इस साल दशहरा के अगले दिन ही मुहर्रम है। दशहरा के अगले दिन दुर्गा प्रतिमा भी विसर्जित की जाती है, इसको देखते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विसर्जन की तारीख बढ़ाने का फैसला किया था यानी बंगाल में दुर्गा प्रतिमा का विसर्जन 1 अक्टूबर की जगह 2 अक्टूबर को किया जाये।