कोलकाता।बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के बंगाल दौरे से टीएमसी कैंप में खलबली क्यों है ? क्या संघ के साथ मिलकर अमित शाह ममता बनर्जी को मात  दे पाएंगे ? 
बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह तीन दिनों के बंगाल दौरे पर राजधानी कोलकाता पहुंचे तो वहां उनका जोरदार स्वागत हुआ. भव्य स्वागत के जरिए बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इस आवाज को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तक पहुंचाने की कोशिश की.लेकिन, लगता है इस आवाज की गूंज पहले ही ममता बनर्जी तक पहुंच चुकी है. अगर ऐसा ना होता तो अमित शाह के कोलकाता पहुंचने से पहले ही नेता जी इंडोर स्टेडियम की बुकिंग रद्द नहीं की गई होती. रूपा गांगुली की तरफ से साफ कहा गया कि ‘कांग्रेस और लेफ्ट के मामले में इस तरह की कोई भी रोक नहीं लगाई गई, बल्कि बीजेपी की ही रैली और कार्यक्रम पर रोक लगा दी जाती है.’दरअसल बीजेपी पूरे बंगाल में धीरे-धीरे अपना पांव पसार रही है. लेफ्ट और कांग्रेस को किनारा कर इस वक्त बीजेपी बंगाल में मुख्य विपक्षी दल की भूमिका में काफी हद तक खड़ी भी हो गई है. इसकी एक बानगी देखने को मिली अभी हाल ही में हुए स्थानीय निकाय के चुनाव में, जहां टीएमसी के सामने सिर्फ बीजेपी ही टिक पाई, कांग्रेस-लेफ्ट का तो कहीं अता-पता तक नहीं था.अभी कुछ दिन पहले ही वृंदावन में संघ की बैठक में पहुंचे बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने बंगाल में संघ से मदद की गुहार भी लगाई थी. बंगाल में आरएसएस का संगठन काफी मजबूत है. बीजेपी को लगता है कि ‘मिशन बंगाल’ में सफल होना है तो संघ की सहायता बगैर ऐसा कर पाना संभव नहीं.कुछ दिन पहले ही बंगाल से ऐसी खबर आई जिसमें ममता सरकार के फैसले पर सवाल उठने लगे. अगले तीन अक्टूबर को कोलकाता में ही संघ प्रमुख मोहन भागवत का एक कार्यक्रम था, लेकिन, इस ऑडिटोरियम की बुकिंग मेंटेनेंस के नाम पर रद्द कर दी गई.ममता की तरफ से बीजेपी और केंद्र की बीजेपी सरकार से टकराव जारी है. लेकिन, इन सबके बावजूद बीजेपी अपने मिशन मोड में काम कर रही है. पार्टी निचले स्तर पर संगठन को मजबूत करने, बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं की टीम तैयार करने के साथ-साथ संघ के साथ समन्वय कर आगे बढ़ रही है.
बांग्लादेश से सटी सीमा पर तस्कर, अवैध हथियारों का मुद्दा और फेक करेंसी के मुद्दे को बीजेपी पहले से ही उठाती रही है. बशीरहाट की हिंसा और इस तरह की और हिंसक वारदातों के बाद ममता सरकार के रवैयै ने उसे और ‘जमीन’ दे दी है. बीजेपी ममता बनर्जी पर खास समुदाय पर पक्षपात का आरोप लगा रही है. इससे होने वाले ध्रुवीकरण का फायदा शायद बीजेपी को मिल भी जाए.लेकिन, संघ और बीजेपी के लोगों को बंगाल में जाकर कार्यक्रम करने से रोकने की अप्रत्यक्ष कोशिश ममता बनर्जी की सियासत को नुकसान पहुंचा सकती है.