कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग को सुरक्षित नामांकन दाखिल कराने के लिए सारे इंतजाम करने का आदेश दिया था, आयोग ने कथित तैयारी भी की थी। लेकिन सोमवार को नामांकन के दौरान राज्य में हुई चुनावी हिंसा की तस्वीर दिल दहला देने वाली रही। विपक्षी दलों के नामांकन रोकने के लिए सत्ताधारी दल के कथित समर्थकों की वाहिनी योद्धाओं के साथ सुबह से ही मैदान में कूद पड़ी। लगभग सभी जिलों में बेलगाम हिंसा देखने को मिली। कहीं लाठी तो कहीं धमकी, कहीं बम तो कहीं गोली, जहां जैसी दवा की जरुरत हुई विपक्षी दलों के नामांकन को रोकने के लिए वाहिनी के योद्धाओं ने दवा का इस्तेमाल किया। वीरभूम के सिउड़ी में एक व्यक्ति की गोली लगने से मृत्यु हुई जबकि उत्तर 24 परगना के गोपालनगर में भी एक व्यक्ति की मृत्यु हुई। कई जिलों में एक के बाद एक कई वाहनों को आग के हवाले किया गया। सत्ताधारी दल के कथित वाहिनी के योद्धाओं ने सांसद, विधायक ही नहीं केंद्रीय मंत्री तक को नहीं राहत दी। और पहले की ही तरह सभी मामलों में विपक्ष ने पुलिस पर मूक दर्शक की भूमिका में रहने का आरोप लगाया जिसे तृणमूल ने खारिज कर दिया है।कहां-क्या हुआ ः मालूम हो कि कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर सोमवार को आयोग ने सुबह 11 बजे से दोपहर बाद 3 बजे तक नामांकन का अतिरिक्त समय तय किया था। लेकिन आदेश मजाक बनकर केवल कागजों में ही सिमट कर रह गया। सोमवार को हुई राज्य व्यापी हिंसा की तस्वीर ने यह स्पष्ट कर ही दिया कि आयोग शांतिपूर्ण नामांकन करने में बिल्कुल विफल रहा तथा विपक्ष नामांकन करने से वंचित रह गया॥ जिलों में सुबह 11 बजे के पहले से ही हिंसा की खबरें आने लगी। विपक्षी दलों के नामांकन को रोकने के लिए कहीं, पत्थर-लाठी तो कहीं बम-गोली से विपक्षी दलों पर हमले की तस्वीरें सामने आने लगीं। जैसे-जैसे समय गुजरता गया, पूरे राज्य में हिंसा अपने परवान पर चढ़ती गई। यहां तक कि कोलकाता के अलीपुर सह विभिन्न जिलों में मीडिया कर्मियों को बेरहमी से निशाना बनाया गया। सत्ताधारी दल के वाहिनी के योद्धाओं का हौसला इस कदर बुलंदी पर था कि उन्होंने महिला मीडिया कर्मियों तक को घंटों तक कब्जे में रोके रखा। उनके मोबाईल व घड़ी छिन लिए गए। मुर्शिदाबाद(बहरमपुर) में वरिष्ठ कांग्रेस विधायक मनोज चक्रवर्ती को जमीन पर पटककर बुरी तरह पीटा गया। उन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। कांग्रेस सांसद आबू हासेन खान चौधरी की गाड़ी पर हमला किया गया। पश्‍चिम बर्दवान के लाउदाहा में केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रिय समर्थकों के साथ नामांकन दाखिल करने जा रहे थे लेकिन यहां तृणमूल समर्थकों की भीड़ ने उन्हें घेर लिया। आरोप है कि पुलिस ने भी केंद्रीय मंत्री के साथ सहयोग नहीं किया। यहां भी विपक्षी नामांकन नहीं कर सके। बाबुल ने बाराबनी में आरोप लगाया कि कुछ दूरी पर ही एसडीओ कार्यालय है लेकिन हमें नामांकन करने से रोका गया। सारे आरोप विपक्ष ने सत्ताधारी दल पर लगाया लेकिन आरोपों की परवाह किए बिना सत्ताधारी दल ने इसे भाजपा की साजिश बताया। तृणमूल महासचिव पार्थ चटर्जी ने कहा कि विपक्षी दलों के पैर के नीचि राजनीतिक जमीन नहीं है। वे किसी भी हालत में पंचायत चुनाव को रोकने की साजिश कर रहे हैं। झारखंड से सुपारी किलर लाकर हिंसा कराई जा रही है।

तीन मरे ः नामांकन को लेकर सुबह से ही वीरभूम के सिउड़ी में तनाव की स्थिति थी। यहां भाजपा व तृणमूल के संघर्ष में शेख दिलदार नामक युवक की गोली लगने से मृत्यु हुई। शेख को पहले उसके पिता ने भाजपा समर्थक बताया लेकिन बाद में तृणमूल जिलाध्यक्ष अणुव्रत मंडल की उपस्थिति में उसके पिता ने बेटे का तृणमूल समर्थक बताया। यहां एक के बाद एक कई घरों वाहिनी के योद्धाओं ने आग लगा दी। उत्तर 24 परगना के गोपालनगर में भी चुनावी हिंसा में और एक व्यक्ति के मारे जाने की खबर है। वहीं, स्वरूपनगर में एक तृणमूल कार्यकर्ता अमिरुल मल्लिक की घर से बुला कर धारदार हथियारों से हत्या करने की घटना हुई। हत्या का आरोप तृणमूल ने माकपा समर्थित अपराधियों पर लगाया है।