2014 में लोकसभा चुनाव के साथ आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और ओडिशा के चुनाव कराए गए थे और 2019 में भी इनके एक साथ ही होने की संभावना है। ऐसे में क्या मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों को टाल कर लोकसभा चुनाव के साथ ही कराया जा सकता है ? पांच पुख्ता वजहें जिनके चलते लोकसभा चुनाव तक टाले जाएंगे तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव
चुनाव टालने के तर्क
1. भारत के निर्वाचन आयोग के सूत्रों का कहना है कि अभी चुनाव आयोग के अधिकारी और खुद मुख्य चुनाव आयुक्त कई राज्यों का दौरा कर रहे हैं। हाल ही में मुख्य चुनाव आयुक्त ने मध्यप्रदेश का भी दौरा किया था। इन अधिकारियों को एक बार फिर इन राज्यों में जाना है और इस पूरी प्रक्रिया में सितंबर का पूरा महीना लग जाएगा।
2. दूसरा तर्क ये है कि अक्टूबर का महीना छुट्टियों और त्यौहारों से भरा है। गांधी जयंती पर 2 अक्टूबर को राष्ट्रीय अवकाश है, 10 अक्टूबर से नवरात्र हैं, 19 अक्टूबर को दशहरा और फिर 7 नवंबर को दीपावली है।
3. इसके अलावा नवंबर के महीने में मध्यप्रदेश में फसलें बोई और काटी जाती हैं ज्यादातर लोग इसमें काफी व्यस्त रहते हैं।
4. चुनाव आयोग के सूत्रों का ये भी कहना है कि नवंबर में मध्यप्रदेश में मुस्लिम समुदाय का बड़ा कार्यक्रम 'आलमी तब्लीगी इज्तिमा' होता है। चुनाव के लिए बड़े पैमाने पर पुलिस बलों की तैनाती की आवश्यकता रहती है। इसलिए नवंबर में भी चुनाव कराने मुश्किल हैं।
5. दिसंबर और जनवरी वो वक्त रहता है जब स्कूलों के शिक्षकों को परेशान नहीं किया जा सकता क्योंकि उस वक्त स्कूलों में पढ़ाई का जोर रहता है और फरवरी में परीक्षा का समय होता है। चुनाव में सुरक्षा के मद्देनजर बड़े पैमाने पर पुलिस और सुरक्षा बलों को ठहराने के लिए स्कूली भवनों की जरूरत रहती है जो उस वक्त मिलना संभव नहीं है।