पर्यावरणविद के रूप में एम वाय योगनाथन की कहानी बहुत दिलचस्प है। योगनाथान कोयंबटूर के ट्रांसपोर्ट कार्पोरेशन में कंडक्टर का काम करते थे। उन्हे पढऩा लिखना भी नहीं आता था लेकिन फिर भी पेड़ों का महत्व वे समझते थे। धीरे धीरे उन्होंने पेड़ लगाने की शुरूआत की। पिछले छब्बीस सालों में वे लगभग 38,000 पेड़ लगा चुके हैं। योगनाथन को लगता है कि उनका अशिक्षित होना पर्यावरण को बचाने की राह में कहीं भी रूकावट नहीं रहा। आज वे तमिलनाडु के विभिन्न स्कूलों में विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हैं। 
ऐसे बचेगा पर्यावरण
जब मैं स्कूल में बच्चों को वृक्षारोपण का महत्व समझाता हूं तो वे खुद भी पौधे लगाना चाहते हैं। ऐसे में उन्हें सिर्फ समझाने से काम नहीं चलता बल्कि मैं खुद उनके साथ मिलकर वृक्षारोपण करता हूं। सच मानिए पर्यावरण को बचाने के लिए किया जाने वाला वृक्षारोपण बहुत ही आसान काम है। बस ऐसे पौधों को चुनें जिन्हें विकसित होने में कम देखभाल की जरूरत पड़े।