नई दिल्ली. मौजूदा कोरोना वायरस संकट से देश की अर्थव्यवस्था को उबारने और मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार ने 20 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज  का ऐलान कर दिया है. आइए जानते हैं कि आखिर कैसे 20 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. बिजेनस पर होने वाले खर्च :- 

 

>> कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) योगदान के जरिए केंद्र सरकार कुल 2,500 करोड़ रुपये खर्च करेगी. इसके तहत केंद्र सरकार उन कर्मचारियों का ईपीएफ योगदान देगी, जिनमें 90 फीसदी कर्मचारियों की सैलरी 15 हजार रुपये से कम होगी. इससे कर्मचारी और कंपनी, दोनों को सीधे तौर पर लाभ मिल सकेगा.

>> इनकम टैक्स रिटर्न (Income Tax Return) के जरिए लोगों के हाथ में 18,000 करोड़ रुपये आएंगे. सरकार ने सभी ​पेंडिंग आईटी रिटर्न को जारी करने का ऐलान किया है. हालांकि, सरकार ने साफ कहा है कि इसपर उसकी खजाने से खर्च नहीं किया जा रहा है. यह लोगों का पैसा है और उन्हें जरूरत के समय पर वापस किया जा रहा है.

>> कारोबार के लिए 3 लाख करोड़ रुपये का ऑटोमेटिक कोलेटरल फ्री लोन जारी किया जाएगा. इसपर भी सरकार अपने खजाने से नहीं खर्च करेगी. हालां​कि, ब्याज पर मिलने वाली सब्सिडी का बोझ सरकार ही उठाएगी.

>> MSME को सबऑर्डिनेट कर्ज के लिए 20 हजार करोड़ रुपये मुहैया कराया जाएगा. इस में केंद्र सरकार अपनी जेब से 4,000 रुपये खर्च करेगी.

>> इक्विटी इनफ्युजन के जरिए बाजार में 50,000 रुपये जारी किए जाएंगे. इसके तहत केंद्र सरकार कंपिनयों में शेयर्स खरीदेगी. यह सरकार की तरफ से एक निवेश होगा.

>> TDS दरों में 25 फीसदी की कटौती के जरिए लोगों के हाथ में 50,000 करोड़ रुपये बच सकेंगे. इसमें केंद्र सरकार का एक रुपया भी नहीं खर्च होगा.

>> रियायती दर पर मुद्रा स्कीम के तहत 1,500 करोड़ रुपये का कर्ज दिया जाएगा. इसका पूरा खर्च केंद्र सरकार ही उठाएगी.

आम लोगों पर कितना खर्च करेगी सरकार?

>> प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (PMGKY) के तहत केंद्र सरकार 1,70,000 करोड़ रुपये खर्च करने का ऐलान किया था. इसके तहत गरीब और जरूरतमंद लोगों को 5 किलो अनाज, फ्री एलपीजी सिलेंडर और जनधन खातों में 500 रुपये ट्रांसफर आदि के ऐलान किए गए थे. इस पर होने वाले पूरे खर्च का बोझ केंद्र सरकार उठाएगी.

>> कोविड-19 टेस्टिंग के लिए इमरजेंसी हेल्थ रिस्पॉन्स पैकेज के तहत 15,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.

>> किसान कार्ड लोन के जरिए किसानों को 2.25 लाख करोड़ रुपये का कर्ज दिया जाएगा. इसका खर्च केंद्र सरकार नहीं उठाएगी.

>> किसानों को 86,600 करोड़ रुपये का लोन दिया जाएगा. इसका बोझ भी केंद्र सरकार की झोली पर नहीं पड़ेगी.

>> प्रवासी मजदूरों को सपोर्ट करने के लिए केंद्र सरकार ने 14,502 करोड़ रुपये खर्च करेगी.

>> इसके लिए अलावा रेहड़ व फेरी वालों को 5 हजार करोड़ रुपये, कैम्पा फंड के जरिए 6,000 करोड़ रुपये, किसानों को 30 हजार करोड़ रुपये का इमरजेंसी फंड और हाउसिंंग लोन इंटरेस्ट सब्सिडी पर 70 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. ये सभी खर्च केंद्र सरकार खुद उठाएगी.

बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए ऐलान

>> कैश रिजर्व रेशियों में कटौती करने के फैसले से 1.37 लाख करोड़ रुपये बाजार में जा सकेंगे. दरअसल, इस कटौती के बाद बैंकों के पास आम लोगों को कर्ज देने के लिए अधिक पूंजी उपलब्ध हो सकेगी. इस पर सरकार का कोई खर्च नहीं होगा.

>> टार्गेटेड लॉन्ग टर्म रेपो ऑपरेशंस (TLTRO) और MSF के जरिए वित्तीय संस्थाओं और म्यूचुअल फंड्स के लिए 2,87,050 करोड़ रुपये की लिक्विडिटी उपलब्ध हो सकेगी.

>> विशेष रिफाइनेंस सुविधा और विशेष लिक्विडिटी सुविधा के तहत 1,30,000 करोड़ रुपये बाजार में पहुंच सकेगा.

>> आंशिक क्रेडिट गारंटी के जरिए बाजार में 45,000 करोड़ रुपये पंप किए जाएंगे.

>> बिजली वितरण कंपनियों को 90 हजार करोड़ रुपये उपलब्ध कराए जाएंगे. इस खर्च केंद्र सरकार नहीं उठाएगी.

>> कृषि ईकाईयों को 6,700 करोड़ रुपये का वर्किंग कैपिटल उपलब्ध कराया जाएगा.

>> NABARDके जरिए रिफाइनेंसिंग पर 29,500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.

अपनी जेब से कुल 3.20 लाख करोड़ रुपये खर्च करेगी सरकार

कुल 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज में केंद्र सरकार 3,20,902 करोड़ रुपये का खर्च सब्सिडी या ट्रांसफर के रूप में उठाएगी. इसके लिए अन्य 16,60,050 करोड़ रुपये लोन या ​अन्य लिक्विडिटी उपायों के जरिए बाजार में डालें जाएंगे. इस पर केंद्र सरकार का कोई खर्च नहीं होगा.

आ​त्मनिर्भर भारत बनाने में कैसे हुए 20 लाख करोड़ रुपये का आवंटन

सरकार ने रविवार को 20 लाख करोड़ रुपये के पूरो पैकेज के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी है. इसके तहत आरबीआई द्वारा उठाए कदम में 8.01 लाख करोड़ रुपये और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत 1.92 लाख करोड़ रुप शामिल किए गए हैं. इसके ​अलावा बीते 5 दिनों में सरकार ने विभिन्न माध्यमों से कुल 11.02 लाख करोड़ रुपये का ऐलान किया है. पहली किस्त में किए गए ऐलानों पर कुल 5.94 लाख करोड़ रुपये, दूसरी किस्त में 3,10 लाख करोड़ रुपये और तीसरी किस्त में 1.50 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इसके अलावा चौथी और पांचवी किस्त में सरकार ने 48,100 करोड़ रुपये के राहत पैकेज का ऐलान किया है.