✍गुरू पूर्णिमा पर गुरू की अराधना के बाद श्रद्धालु एक माह के लिए गुरूओं के गुरू भगवान शिव की पूजा मे लीन हो जायेगें गुरू पूर्णिमा ९ जुलाई की है और भगवान शिव का महीना माना जाने वाला सावन १० जुलाई से शुरू हो रहा है २७ बर्ष बाद एैसा संयोग बना है कि इस बार सावन भगवान शिव के दिन सोमवार को शुरू होगा और इसका समापन भी सोमवार को ही होगा
१९९० में एैसा संयोग बना था इसे इन्दुवार हर्षण योग कहते है पूरे माह में इस बर्ष पांच सोमवार पड़ेगे इस बर्ष सावन माह में सोमवार व्रत का पुण्य हजारो गुना अधिक होगा और व्रती पर भगवान शिव की अक्षय कृपा बनी रहेगी।
पहला सोमवार-
दस जुलाई को सावन का पहला सोमवार है इस दिन उतराषाढ़ नक्षत्र और वैधृति योग है दिन के स्वामी चन्द्रमा पर देवगुरू वृहस्पति की पूर्ण दृष्टि है इसलिए इस दिन का व्रत ज्ञान वृद्धि के लिए सर्वोत्तम है इस दिन ब्रत करने से व्यापारिक कार्यो में भी समृद्धि का योग प्राप्त होगा।
दूसरा सोमवार-
दूसरा सोमवार सत्रह जुलाई को पड़ेगा इस दिन अष्टमी तिथि अश्विनी नक्षत्र और धृति योग है स्वामी चन्द्रमा राज्य स्थान मे है इस दिन का ब्रत राज्कीय कार्यो में सफलता दिलाएगा।
तीसरा सोमवार-
तीसरा सोमवार चौबिस जुलाई को है इस दिन प्रतिप्रदा तिथि पुण्य नक्षत्र और सिद्धि योग है इस दिन का ब्रत दिन के स्वामी चन्द्रमा केंद्रगत शरीर पर होने से अरोग्ता व वंश वृद्धि के लिए उत्तम रहेगा।
चौथा सोमवार-
चौथा सोमवार ३१ जुलाई को है इस दिन अष्टमी तिथि स्वाती नक्षत्र और शुभ योग है दिन के स्वामी चन्द्रमा के भूमि,भवन व सुख के स्थान पर से दिन के ब्रत से भूमि,भवन व भौतिक सुख की प्राप्ति के योग है।
पांचवा सोमवार-
सावन माह का पांचवा व अन्तिम सोमवार सात अगस्त को है इस दिन पूर्णिमा तिथि,श्रवण नक्षत्र और आयुष्मान योग है दिन का स्वामी चंन्द्रमा के सप्तम स्थानंगत होने से विवाह के योग बनेगे और दामपत्य जीवन में मधुरता व सुख का प्रवेश होगा।।