पंख से नहीं हौसले से उड़ान होती है. यह साबित किया है सोनीपत के दिवाना गांव की रहने वाली अनु कुमारी ने . वे कहने को तो 4 साल के बच्चे की मां है लेकिन बच्चे की मां होने के बाद भी इस मुकाम को हासिल करके अनु ये साबित कर दिया, कि सपनों में जान हो तो पंख से कुछ नहीं होता हौसलो से उड़ान होती है.संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा के शुक्रवार को घोषित नतीजों अनु कुमारी ने देश भर में दूसरा स्थान हासिल किया है. इससे पहले वह वक प्री में एक अंक से चूक गई थी.अनु ने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा की तैयारी करने के लिए 20 लाख रुपए के वार्षिक वेतन की नौकरी छोड़ी और अपने चार साल के बच्चे से डेढ़ साल तक दूर रहकर तैयारी कर ये मुकाम हासिल किया. रिपोर्ट के मुताबिक 31 साल की अनु की एक बिज़नैसमैन से शादी हुई है. चार साल पहले वह एक बेटे की मां भी बनी .अनु ने दिल्ली की विश्वविद्यालय के हिन्दू कॉलेज से फिजिक्स में ऑनर्स किया. इसके बाद में उसने नागपुर से एमबीए किया. अनु के पिता भी हाल के दिनों में प्राइवेट सेक्टर से रिटायर्ड हुए हैं जबकि मां गृहणी हैं. अनु कहती हैं कि मां-बाप का उन्हें बहुत समर्थन मिला. अपनी कामयाबी का श्रेय परिवार को देते हुए अनु कहती हैं कि मां उनकी रोल मॉडल हैं. परीक्षा में महिला उम्मीदवारों को कामयाबी का मंत्र देते हुए अनु कहती हैं कि बस जाओ और अपने सपनों को साकार करो. अगर महिलाओं को अधिकार मिलता है तो देश की आधी आबादी खुद ब खुद अपना अधिकार पा लेगी.