बांधाघाट (हावड़ा) : श्रीमद् भागवत प्रचार समिति द्वारा आयोजित अष्ट दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के अन्तिम दिन की शुरूवात सामूहिक सुन्दरकाण्ड पाठ से की गयी। श्री श्रीनिवास जिन्दल एवं श्री ओमप्रकाश जी तलवण्डीवाला के द्वारा श्री राम भक्त महावीर हनुमान का पूजन किया गया। व्यासपीठ पर आसीन भगवाताचार्य श्री जयप्रकाश जी शास्त्री ने श्री भागवत पुराण की कथा को विराम देने से पहले कहा कि भागवत कथा अनन्त है।  श्रीमद् भागवत के बारह स्कन्द भगवान श्री कृष्ण के ही बारह अंग है। इसका निरन्तर श्रवण मनुष्य को  शोक,  मोह,  और भय से मुक्त करता है।  सुदाम देव चरित्र पर शास्त्री जी ने कहा कि पत्नी के बार बार अनुरोध पर जब श्री कृष्ण से मिलने जाते है, उनकी अभिलाषा भगवद्दर्शन की है जब कि उनकी पत्नी सुशीला भगवान से धन की आशा रखती है। प्रभु शरणागति के बाद सुदाम देव के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और सारी कामनाएं पूर्ण हो जाती है। सुदामा जी ने कृष्ण से प्रार्थना की : हे भगवन आपके साथ जन्म - जन्मान्तर  में मेरा सरण्य, मैत्री, तथा दास्य भाव इसी प्रकार बना रहें। यह सत्य है कि भगवच्छरणागति मनुष्य की सभी कामनाओं को पूरा करती है। 
श्री कृष्ण - सुदामा नृत्य नाटिका के पश्चात व्यासपीठ पर आसीन श्री जयप्रकाश जी शास्त्री का पूजन मुख्य यजमान श्री रामफल जी जिन्दल ने किया। 
समिति के आनन्द कुमार जैन,  मनोज लुहारीवाला, संजय केजरीवाल ने सभी सहयोगियों को उनके तन-मन-धन  से सहयोग के लिए साधुवाद एवं धन्यवाद किया तथा श्रोताओं और यजमानों से जाने - अनजाने हुई भुल-त्रुटियों के लिए करबद्ध क्षमा प्रार्थना की।​