अयोध्या I राम मंदिर निर्माण की कवायद काफी जोरों पर है. राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने 5 अगस्त को भूमि पूजन के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शामिल होने के लिए निमंत्रण भेजा है. पीएम मोदी के अलावा बीजेपी के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी सहित राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे तमाम नेता भूमि पूजन कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं.
राम मंदिर का बड़ा आंदोलन 1990 में हुआ था. 30 अक्टूबर 1990 को विवादित परिसर में बने बाबरी मस्जिद के गुंबद पर कोठारी बंधुओं ने भगवा झंडा फहराया था. इसके बाद 2 नंवबर को पुलिस फायरिंग में दोनों भाइयों की मौत हो गई थी.
अयोध्या के राम मंदिर आंदोलन की जब भी बात आती है तो कोलकाता के कोठारी बंधुओं के योगदान की अक्सर चर्चा की जाती है. ऐसे में सवाल  उठता है कि कोठारी बंधुओं के परिवार वालों को भूमि पूजन कार्यक्रम में क्या बुलाया जाएगा?
कोठारी बन्धुओं की इकलौती बहन पूर्णिमा कोठारी ने महानगर मीडिया को बताया कि अभी तक आमंत्रण मिला नहीं है, लेकिन उन्हें विश्वास है कि राम मंदिर ट्रस्ट इस शुभ अवसर पर उन्हें अवश्य याद करेगा। बताना प्रासंगिक है कि कोठारी बन्धुओं के माता-पिता अब संसार में नहीं हैं। सिर्फ बहन पूर्णिमा और उनका परिवार है। कोलकातावासी भी कोठारी परिवार के निमंत्रण को लेकर प्रतीक्षा में हैं। कोठारी बन्धुओं के साथ हजारों की संख्या में कारसेवक अय़ोध्या गए थे।
दरअसल, 2019 में बीजेपी दूसरी बार सत्ता में आई थी तो पश्चिम बंगाल के राजनीतिक हिंसा में मारे गए पार्टी कार्यकर्ताओं के परिवार वालों को पीएम मोदी के शपथ ग्रहण में बुलाया गया था, जिसमें वो बकायाद शामिल भी हुए थे. ऐसे में राम मंदिर आंदोलन के दौरान 1990 में काफी कारसेवकों की मौत पुलिस की फायरिंग में हुई थी.
1990 में उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री थे. विश्व हिंदू परिषद के आव्हान पर अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए देश के कोने-कोने से हजारों कार सेवक जुटे थे. 30 अक्टूबर तक 1990 तक अयोध्या में लाखों की संख्या में कार सेवक जुट चुके थे. अयोध्या में लगे कर्फ्यू के बीच सुबह करीब 10 बजे चारों दिशाओं से बाबरी मस्जिद की ओर कारसेवक बढ़ने लगे. इसी दिन बाबरी मस्जिद के गुंबद पर शरद कोठारी और रामकुमार कोठारी दोनों भाइयों ने भगवा झंडा फहराया.
वरिष्ठ पत्रकार हेमंत शर्मा की किताब ‘अयोध्या के चश्मदीद’ के अनुसार 30 अक्टूबर को गुंबद पर झंडा लहराने के बाद शरद और रामकुमार 2 नवंबर को विनय कटियार के नेतृत्व में दिगंबर अखाड़े की तरफ से हनुमानगढ़ी की तरफ जा रहे थे.
जब पुलिस ने गोली चलाई तो दोनों पीछे हटकर लाल कोठी वाली गली के एक घर में छिप गए. लेकिन थोड़ी देर बाद जब वे दोनों बाहर निकले तो पुलिस फायरिंग का शिकार बन गए. दोनों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया. दोनों की मौत की खबर जब कोलकाता पहुंची तो पूरे परिवार में सन्नाटा पसर गया.
पुलिस ने दोनों के शव परिवार को सौंपने से मना कर दिया था. हीरालाल में इतनी भी हिम्मत नहीं बची थी कि वो अपने बेटों का शव देख पाएं. 4 नवंबर 1990 को शरद और रामकुमार कोठारी का सरयू के घाट पर अंतिम संस्कार किया गया. उनके अंतिम संस्कार में हजारों लोग उमड़ पड़े थे.
शरद और रामकुमार का परिवार पीढ़ियों से कोलकाता में रह रहा है. हालांकि, मूलतः वे राजस्थान के बीकानेर जिले के रहने वाले थे. कोठारी बंधुओं की याद में कुछ संगठनों ने 2 नवंबर को शौर्य दिवस मनाना भी शुरू किया था. ऐसे में अब जब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राम मंदिर निर्माण का कार्य तेजी से हो रहा है और 5 अगस्त को भूमि पूजन कार्यक्रम में क्या कोठारी बंधुओं के परिवार वालों को राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट निमंत्रण भेजेगा?
न्यूज़ संभार - महानगर मीडिया