à¤®à¤¹à¤¾à¤¨à¤—र के स्कूलों में लॉकडाउन के दौरान अनावश्यक फीस वसूले जाने को लेकर अभिभावकों में काफी असंतोष देखा जा रहा है। लगभग प्रत्येक दिन ही किसी ना किसी प्रसिद्ध स्कूल के सामने पेरेंट्स फोरम की तरफ से अभिभावक विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। अब एक साथ करीब 85 निजी स्कूलों के अभिभावकों ने फीस-वृद्धी के विरोध में विरोध जताने का निर्णय लिया है। अभिभावकों के संयुक्त मंच की तरफ से 11 जून को धर्मतल्ला में सम्मेलन और विरोध-प्रदर्शन करने का फैसला किया गया है। अभिभावकों की मांग है कि स्कूलों को अवांछनिय फीस को माफ करके केवल ट्यूशन फीस लेना होगा। इस संयुक्त मंच के कंवेनर सुप्रिय भट्टाचार्य ने बताया कि देशभर में मार्च से लॉकडाउन चल रहा है। इस दौरान स्कूलों को भी बंद कर दिया गया है।

वर्तमान समय में देश आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है। देशभर में हमारे जैसे हजारों अभिभावक आर्थिक समस्याओं से जुझ रहे हैं। ऐसी परिस्थिति में कोलकाता समेत राज्य भर के 85 निजी स्कूलों के अभिभावकों के संयुक्त मंच ‘यूनाईटेड गार्जियन एसोसिएशन’ की तरफ से हम मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से अनुरोध करते हैं कि सिर्फ स्कूल फीस में वृद्धी ही नहीं कर रहे हैं। बल्कि इस समय में ही रि-एडमिशन के बहाने कई स्कूल बस फेयर, लैब फीस, डेवलपमेंट फीस, इलेक्ट्रीक फीस जैसे लाखों रुपये वसूल रहे हैं। इस समय इन फीसों का औचित्य ही नहीं बनता है कुछ, क्योंकि स्कूल बंद हैं। स्कूल कब खुलेंगे, स्कूल इस वर्ष खुलेंगे भी या नहीं, इस बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है। हम अनुरोध करते हैं कि स्कूल अनावश्यक फीस को माफ कर दें।

लॉकडाउन के दौरान अभिभावकों से केवल ट्यूशन फीस लिया जाए। इस बीच अपनी मांगों के समर्थन में अभिभावकों ने ऑनलाइन हस्ताक्षर कैंपेन भी चलाया है, जहां हजारों अभिभावकों ने हस्ताक्षर भी किया और इसे बाद में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पास भी भेजा गया था। किन्तु कोई जवाब नहीं मिला। इसलिए हम मुख्यमंत्री के साथ बैठक कर इस समस्या का समाधान करना चाहते हैं। संयुक्त मंच के कंवेनर सुप्रिय भट्टाचार्य ने बताया कि इसलिए हमने अपने आंदोलन को और जोरदार करने का निर्णय लिया है। यदि हमारी मांगों को स्वीकार नहीं किया जाता है या सरकार का कोई प्रतिनिधि हमारे साथ बैठक नहीं करता है तो हमारे पास 2 रास्ते ही खुले हैं। या तो हम अपने आंदोलन को और बड़ा बनाएंगे, या फिर कानूनी सहायता ली जाएगी। ऐसी सूरत में हम हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे और उनके विचार पूछेंगे। साथ ही हम मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भी इस विषय को मानवियता के साथ विवेचना करने का अनुरोध कर रहे हैं।